Saturday, August 15, 2026
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Agricultural Revolution in Betul : नरवाई जलाने की समस्या का अंत और किसानों की आय दोगुनी करने का ‘मास्टर प्लान’

बैतूल में किसानों के बीच रीपर कम बाइंडर और स्ट्रॉ रीपर का जीवंत प्रदर्शन, नरवाई प्रबंधन को बढ़ावा

बैतूल, 10 मार्च 2026।
गेहूं कटाई के बाद खेतों में बचने वाली नरवाई को जलाने की समस्या से निपटने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा किसानों के बीच आधुनिक कृषि यंत्रों का जीवंत प्रदर्शन और नरवाई प्रबंधन कार्यशाला आयोजित की गई। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देशन में आयोजित इस पहल का उद्देश्य किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के आधुनिक और लाभकारी तरीकों से अवगत कराना था।

आधुनिक यंत्रीकरण से खेती में आई लागत में कमी

कार्यक्रम में बैतूल विकासखंड के ग्राम रौंदा के प्रगतिशील किसान संजय कुमार साहू ने आधुनिक कृषि यंत्रीकरण अपनाकर खेती की लागत कम करने और फसल अवशेष प्रबंधन में सफल उदाहरण प्रस्तुत किया।
उन्होंने अपने खेत में रीपर कम बाइंडर मशीन से गेहूं की कटाई की, जिसका प्रदर्शन आसपास के किसानों को दिखाया गया। इस मशीन की मदद से कम समय में प्रभावी कटाई संभव होती है और खेत में बहुत कम नरवाई बचती है।

किसानों को दी गई यंत्रों की जानकारी

कार्यशाला में सहायक कृषि यंत्री डॉ. प्रमोद कुमार मीना ने किसानों को रीपर कम बाइंडर की कार्यप्रणाली, उपयोग और सरकारी अनुदान प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मशीन से कटाई के बाद खेत में केवल 4 से 5 इंच तक नरवाई बचती है, जिससे किसानों को उसे जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसके परिणामस्वरूप खेत जल्दी साफ हो जाता है और अगली फसल की तैयारी भी समय पर की जा सकती है।

हिवड़खेड़ी में स्ट्रॉ रीपर का फील्ड प्रदर्शन

इसी क्रम में ग्राम हिवड़खेड़ी में भी नरवाई प्रबंधन कार्यशाला आयोजित की गई, जहां किसानों को स्ट्रॉ रीपर मशीन का फील्ड प्रदर्शन दिखाया गया। कम्बाइन हार्वेस्टर से गेहूं की कटाई के बाद खेत में बची नरवाई को स्ट्रॉ रीपर के माध्यम से भूसे में बदल दिया जाता है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है।

भूसे से अतिरिक्त आय का अवसर

विशेषज्ञों के अनुसार स्ट्रॉ रीपर से तैयार भूसा बाजार में लगभग 2000 रुपये प्रति ट्रॉली तक बिक सकता है। इसके अलावा कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई के बाद एक एकड़ खेत में बचा हुआ लगभग 15 से 50 किलोग्राम गेहूं भी इस मशीन से एकत्र किया जा सकता है। इससे किसानों को प्रति एकड़ 375 से 1250 रुपये तक अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।

किसानों से नरवाई नहीं जलाने की अपील

कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेष को जलाने के बजाय उसके वैज्ञानिक प्रबंधन को अपनाएं। इसके लिए विभाग द्वारा किसानों को स्ट्रॉ रीपर, रीपर कम बाइंडर, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, रोटावेटर और मल्चर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।

किसानों की सक्रिय भागीदारी

इस अवसर पर विभागीय कर्मचारियों के साथ-साथ क्षेत्र के कई किसान मौजूद रहे। कार्यक्रम में लखन पवार, निखिल पवार, दिनेश पवार सहित अन्य किसानों ने भाग लेकर आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की और नरवाई प्रबंधन के नए तरीकों में रुचि दिखाई।

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