आमला। नगर में अवैध सट्टे के कारोबार पर पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ महज एक हफ्ते में ही बेअसर साबित हो गई है। थाना प्रभारी की वापसी के बाद 28 अप्रैल को जिस तरह 5 एजेंटों को दबोचा गया था, उससे लगा था कि अब शहर से सट्टे का कलंक मिट जाएगा। लेकिन हकीकत इसके उलट है। कार्रवाई के ठीक एक सप्ताह बाद मुख्य सरगनाओं ने फिर से अपना जाल बिछा लिया है और शहर के चौक-चौराहों पर सट्टे का खेल दोबारा शुरू हो चुका है।
दिखावे की रही कार्रवाई, पुराने खिलाड़ियों ने फिर संभाला मोर्चा
विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस की कार्रवाई के बाद कुछ दिन तो सन्नाटा रहा, लेकिन अब मुख्य खाईवाल वीरेंद्र चौहान उर्फ डेनी और उसके साथियों ने खुलेआम अपना धंधा फिर शुरू कर दिया है। डेनी वही नाम है जो लंबे समय से अवैध गतिविधियों में लिप्त रहा है और जेल की हवा भी खा चुका है। बावजूद इसके, पुलिस की ढील ने उसके हौसलों को इतनी उड़ान दे दी है कि अब उसे कानून का कोई डर नहीं रह गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस केवल छोटे मोहरों (एजेंटों) को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि बड़े मगरमच्छ अब भी गिरफ्त से बाहर हैं।
आम नागरिकों में आक्रोश ‘खानापूर्ति नहीं, जिला बदर की हो कार्रवाई’
क्षेत्र में अमित गतिविधियों को लेकर आम नागरिकों में आक्रोश नजर आ रहा है जिसमें पुलिस की कार्यप्रणाली अब संदेह के घेरे में है। सट्टे की लत ने कई घरों को बर्बाद कर दिया है। लोगों ने चर्चा के दौरान स्पष्ट कहा कि जब तक वीरेंद्र चौहान उर्फ डेनी और उसके प्रमुख सहयोगियों पर कड़ी धाराएं लगाकर उन्हें जिला बदर नहीं किया जाता, तब तक आमला में सट्टा बंद होना नामुमकिन है। पुलिस द्वारा मामला दर्ज करना अब केवल एक कागजी खानापूर्ति नजर आ रहा है, क्योंकि कार्रवाई के अगले ही दिन ये अपराधी फिर से सक्रिय हो जाते हैं।
पुलिस की कार्य प्रणाली को लेकर जनता के सवाल
एक दिन की सक्रियता के बाद पुलिस ठंडी क्यों पड़ गई?
जेल जा चुके पुराने अपराधियों पर निगरानी क्यों नहीं रखी जा रही?
सट्टा कारोबारियों को किसी प्रभावशाली व्यक्ति या विभाग का अंदरूनी संरक्षण प्राप्त है?
सट्टे के अवैध कारोबार से युवा पीढ़ी बर्बाद
शहर की गलियों में चल रहे इस अवैध कारोबार का सबसे बुरा असर युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है। कम समय में ज्यादा पैसे कमाने के लालच में युवा इस दलदल में फंसते जा रहे हैं। नागरिकों ने मांग की है कि उच्च अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप करें और आमला पुलिस को सख्त निर्देश दें कि केवल ‘केस डायरी’ भरने के बजाय जमीन पर ठोस परिणाम दिखें।





