बैतूल।( कौशल घोड़के ) आज के समय में बालिका पूजन का अर्थ यही है कि भक्त कन्याओं को मान-सम्मान दें और समाज में उनकी भूमिका को समझें। इसी उद्देश्य से शाला प्रबंधन समिति सिमोरी द्वारा ग्राम पंचायत सिमोरी के शासकीय माध्यमिक शाला सिमोरी में एक अभिनव आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम शाला की सभी बालिकाओं को समिति के पदाधिकारियों द्वारा आसन पर बिठाया गया। माता ताप्ती के पवित्र जल से बालिकाओं के चरण पखारकर उनकी आरती उतारी गई और सम्मान स्वरूप पुष्पमाला पहनाई गई।
शिक्षक शैलेंद्र बिहारिया ने निजी व्यय पर स्कूल बैग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु नेशनल मीन्स कम मैरिट की किताबें भेंट कीं, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक साबित होंगी। इस अवसर पर दसन धुर्वे, पंच रामकली धुर्वे, अजय बडौदे, मनोज बडौदे, बालचंद वरकड़े, सतीश कुमरे ने बालिकाओं का सम्मान कर उनका मुंह मीठा कराया। पूर्व सैनिक बालचंद वरकड़े ने कहा कि वे यहां की बालिकाओं को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग देंगे।
शैलेंद्र बिहारिया ने कहा कि आज के समय में भी ग्रामीण क्षेत्रों में बेटा-बेटी के बीच अंतर किया जाता है, जबकि आज की बालिकाएं हर क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं। बेटियों का जब सम्मान कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा, तो वे अवश्य बेहतर प्रदर्शन करेंगी। इसी उद्देश्य से आज उन्हें स्कूल बैग वितरित किए गए हैं। यह अभिनव पहल शाला प्रबंधन समिति की ओर से बालिकाओं को आगे बढ़ाने की प्रेरणादायक कोशिश है। हम सभी को बालिकाओं का सम्मान करना चाहिए और उन्हें शिक्षा के लिए हर संभव मदद देनी चाहिए। तभी नवरात्रि में कन्या पूजन की सार्थकता है। इस अवसर पर पंच रामकली धुर्वे ने कहा हमारी बेटियां सूर्य के जैसे चमकें, जिन्हें कोई नजरें नहीं मिला सके। हमें उन्हें इतना सशक्त बनाना है।





