गुरुद्वारा गुरुसिंघ सभा बैतूल में सुबह 10 बजे से आयोजित होगा विशाल ब्लड डोनेशन कैंप
“सतगुर नानक परगटया मिटी धुंध जग चानण होया जो कर सूरज निकलया तारे छपे अंधेर पलोआ” अमृतवाणी से धर्ममय होगा वातावरण
रिपोर्ट कृष्णाराव वागद्रे
बैतूल। सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरुनानक देव जी का 554वां प्रकाश पर्व आज 27 नवम्बर को श्रद्धा व सत्कार के साथ मनाया जाएगा। गुरु पूरब के अवसर पर आज 27 नवंबर को गुरुद्वारा गुरुसिंघ सभा बैतूल में विशाल ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित किया गया है। कैंप सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे आयोजित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि गुरुद्वारा गुरुसिंघ सभा बैतूल में 26 नवम्बर की शाम से ही धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए। गुरु पूरब के अवसर पर गुरुद्वारा में कीर्तन करने के लिए अमृतसर से विशेष तौर पर कीर्तन जत्था भाई हरमीत सिंघ खालसा पहुंच रहे है, जो अपनी अमृतमयी बाणी से श्रद्धालुओं को निहाल करेंगे। “सतगुर नानक परगटया मिटी धुंध जग चानण होया जो कर सूरज निकलया तारे छपे अंधेर पलोआ” अमृतवाणी से पूरा वातावरण आज धर्ममय हो जाएगा।
गुरुद्वारा कमेटी से मिली जानकारी अनुसार गुरुद्वारे में 27 नवंबर को सुबह 11 बजे से कीर्तन शुरू होंगे जो दोपहर 1 बजे तक चलेंगे। दोपहर 1 बजे से गुरु का लंगर शुरू होगा। आज 27 नवंबर की शाम को भी विशेष कीर्तन दीवान और गुरु का लंगर होगा। शाम का दीवान शाम 7 बजे से से रात 9 बजे तक चलेगा। गुरुद्वारा कमेटी ने बताया हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु नानक जयंती का पर्व मनाया जाता है। इतिहासकारों के अनुसार 15 अप्रैल 1469 की कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुुरु नानक का जन्म हुआ था। गुरु नानक देव जी को सिख धर्म का संस्थापक माना जाता है। इसी कारण हर साल उनके जन्मदिन को गुरु पूरब या प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गुरुद्वारा में विभिन्न कार्यक्रम के साथ-साथ कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
गुरु नानक जयंती का यह है इतिहास
माना जाता है कि गुरु नानक सिख धर्म के पहले गुरु है। 15 अप्रैल 1469 को गुरु नानक देव का जन्म तलवंडी ननकाना साहिब में हुआ था। इसी के कारण इन्हें नानक नाम से संबोधित किया जाता है। माना जाता है कि गुरु नानक देव ने ही सिख समाज की नींव रखी थी। इसी कारण उन्हें संस्थापक कहा जाता है। 16 साल की उम्र में गुरु नानक देव का विवाह लाखौकी नामक स्थान में रहने वाली सुलखनी नामक कन्या से हुआ था। इनके दो पुत्र श्रीचंद और लख्मीचंद थे। माना जाता है कि पुत्रों के जन्म के बाद गुरु नानक देव अपने साथियों के साथ तीर्थ में निकल गए और भारत, अफगानिस्तान, फारस, अरब सहित कई देशों में भ्रमण करते हुए उपदेश देते थे। इन यात्राओं को पंजाबी में ‘उदासियां’ कहा जाता है। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सभी श्रद्धालु को गुरुपुरब की बधाई दी है।






