बैतूल।( कौशल घोडके ) देशभक्ति के पवित्र पर्वों को भी बैतूल नगर पालिका परिषद ने भ्रष्टाचार की चादर से ढंक दिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन भारत के जिला संगठन मंत्री एवं आवेदक कन्हैयालाल चौकीकर द्वारा मांगी गई सूचना से खुलासा हुआ है कि नगर पालिका में वर्षों से एक ही सामग्री के नाम पर बार-बार अलग-अलग आकार और मात्रा दिखाकर लाखों रुपये का फर्जी भुगतान किया जा रहा है। आवेदक का आरोप है कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी अधूरी, गुमराह करने वाली और छिपावपूर्ण है, जिससे यह साफ है कि जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
कन्हैयालाल चौकीकर ने बताया कि 16 जनवरी 2025 को जो जानकारी दी गई थी और 17 अप्रैल 2025 को प्राप्त जानकारी में बड़ा अंतर है। अधीक्षक सरल जानकारी देने के बजाय पत्राचार में समय गवांते हैं, अधूरी जानकारी देकर मामले को घुमाते हैं। यही रवैया दोषियों को बचाने की मंशा को साफ दर्शाता है।
नगर पालिका द्वारा दिए गए जवाब में बार-बार स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई जानकारियों की जांच नहीं की गई। उदाहरण के तौर पर, 26 जनवरी को पुलिस ग्राउंड में जो सामग्री लगती है, उसके बारे में 24 जनवरी 2025 को जांच हेतु आवेदन दिया गया था, लेकिन आज तक कोई जांच नहीं हुई। दशहरा उत्सव, 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे आयोजनों में एक दिन के कार्यक्रम के लिए तीन-तीन दिन का भुगतान किया गया, जबकि वस्तुस्थिति में केवल एक दिन सामग्री का उपयोग होता है।
– बिलों में किया गड़बड़झाला
बिलों में किए गए गड़बड़झाले चौंकाने वाले हैं। स्टील के सामान्य सोफों को वीआईपी सोफा बताकर भुगतान किया गया। बाउंड्रीवाल, जो सामान्यतः तीन फीट की होती है, उसे बिलों में पांच से छह फीट चौड़ी और 1200 फुट लम्बाई तक दर्शाया गया है। जबकि ग्राउंड की वास्तविक आवश्यकता इतनी नहीं होती। बिल क्रमांक 208 दिनांक 18.08.2024 में बाउंड्रीवाल (तिरंगा) 6×4300 फुट दर्शाकर लाखों रुपये का भुगतान किया गया। वहीं 26 जनवरी 2024 के बिल में बाउंड्रीवाल 6×1800 फुट दर्शाई गई, जो वास्तव में 3 फुट की ही होती है।
चुनावी व्यवस्था में भी गड़बड़ी उजागर हुई है। लोकसभा चुनाव के लिए पोलिंग बूथ पर लगाए गए डोम सेट, एक्रेलिक मेटिंग और पेडस्टल फैन की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई, जबकि अधिकांश स्थानों पर चटाई बिछाई जाती है और सामान्य फैन ही लगाए जाते हैं। वीडियो रिकॉर्डिंग से मिलान करने पर स्पष्ट हो जाएगा कि भुगतान वास्तविकता से मेल नहीं खाता।
– एक जैसी सामग्री होने के बावजूद हर बार दिखाई गईं अलग-अलग संख्या और दरें
बिलों का मिलान करने पर साफ होता है कि 15 अगस्त और 26 जनवरी के कार्यक्रमों में एक जैसी सामग्री होने के बावजूद हर बार अलग-अलग संख्या और दरें दिखाई गईं। कभी वीआईपी सोफा 90 नग, तो कभी 150 नग दिखाया गया, कभी डोम सेट की संख्या 60, तो कभी 98 नग बताई गई। मतदान केंद्रों में 10 फुट ऊंची सीलिंग के स्थान पर डोम के महंगे रेट में भुगतान किया गया।
सबसे हैरानीजनक बात यह है कि पंजाबी समाज द्वारा आयोजित रामलीला के 12 दिन के कार्यक्रम के लिए नगर पालिका द्वारा 15 दिन का भुगतान कर दिया गया। दशहरा उत्सव, जो मात्र 3 घंटे का होता है, उसके लिए दो-दो दिन का भुगतान किया गया। इससे साफ है कि नगर पालिका में भ्रष्टाचार योजनाबद्ध और सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है।
– सभी बिलों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
आवेदक कन्हैयालाल चौकीकर ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को सौंपे गए शिकायत पत्र में मांग की है कि इन सभी बिलों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए और दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएं। साथ ही कहा कि आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी अधूरी देना स्वयं ही सूचना का दमन है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।





