Saturday, October 17, 2026
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आधुनिक समय क्या वाकई में भावनाओ और संवेदनाओं के अकाल का समय है, जिसमे बच्चो का रोना भी महसूस नही होता उनको

 

आधुनिक समय क्या वाकई में भावनाओ और संवेदनाओं के अकाल का समय है, जिसमे बच्चो का रोना भी महसूस नही होता उनको

रिपोर्ट – मनोज कश्यप

ADM News Amla : डॉक्टर को धरती पर भगवान की संज्ञा दी गई है, क्योकि भगवान और डॉक्टर दोनों जीवन देते भी है और बचाते भी है। पर क्या आमला के डॉक्टर इस भगवान रूपी संज्ञा का मान रख पा रहे है!! ताजा मामला आमला के एक वरिष्ठ डॉक्टर से जुड़ा है, आमला हॉस्पिटल ही में हमेशा जमे रहे पूर्व बीएमओ डॉक्टर बी.पी चौरिया जो अब रिटायर्ड होने के बाद स्वयं का क्लिनिक चला रहे है, नगर के व्यवसायी मनोज कश्यप ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि इस 17 सितंबर, दिन रविवार उनकी बेटी छत पर गिर गई थी, वे तुरंत उसको लेकर डॉक्टर चौरिया के क्लिनिक पहुँचे, एवं डॉक्टर चौरिया से चेकअप करवाने का आग्रह क्लिनिक के कर्मचारी रवि से किया, पर रवि ने श्री कश्यप को 3 नम्बर का एक टोकन पकड़ा कर इंतजार करने को कहा, बेटी असहनीय दर्द की वजह से लगातार रोये जा रही थी, इस पर भी कर्मचारी रवि और डॉक्टर चौरिया की संवेदना नही जागी, श्री कश्यप ने बताया उन्होंने पुनः रवि से हाथ जोड़कर निवेदन किया कि बेटी रो रही है, दिखा लेने दो, पर वे टस से मस नही हुए, बाद में श्री कश्यप द्वारा बेटी का इलाज आमला मे अन्य डॉक्टर एवं बैतूल में करवाया गया।

सवाल उठता है कि पैसे कमाने की चाह और मरती संवेदना में एक डॉक्टर इतना निष्ठुर कैसे हो जाता है कि किसी बच्चे की असहनीय पीड़ा और रुदन को अनसुना कर दे, बच्चो का दर्द तो भगवान को भी रुला देता है फिर ये भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर का मन क्यों नही पसीजा।

खैर ये इन डॉक्टर साहब की असंवेदनशीलता का पहला मामला नही था, इससे पहले भी कई बार वे इस तरह और अन्य विवादों में नजर आ चुके है।

वैसे डॉक्टर चौरिया को नगरपालिका आमला द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण से जुड़े जिम्मेदारी भरे अभियान में आमला का ब्रांड एम्बेसडर भी बनाया जा चुका है, इस संदर्भ में नगरपालिका सीएमओ श्री नीरज श्रीवास्तव से जब पूछा गया कि स्वच्छता सर्वेक्षण में डॉक्टर चौरिया को ब्रांड एम्बेसडर क्यों बनाया गया, तो उन्होंने जवाब दिया कि शहर के गणमान्य नागरिक को ब्रांड एम्बेसडर बनाया जाता है, प्रतिप्रश्न में जब सीएमओ साहब से जानकारी चाही कि शहर या शहर वासी के भले के लिए डॉक्टर चौरिया ने ऐसे क्या काम किये है कि उन्हें गणमान्य मानकर ब्रांड एम्बेसडर बना दिया गया, या सिर्फ पूर्व बीएमओ होना काफी था, इस पर सीएमओ साहब के पास जवाब नही था, जब सीएमओ साहब से एक सवाल और किया गया कि बतौर ब्रांड एंबेसडर रहते डॉक्टर चौरिया का स्वच्छता अभियान में क्या योगदान रहा एवं वे आमलावासियों को किस तरह और कितना प्रेरित कर पाए, इस पर भी सीएमओ साहब मौन हो गए। खैर चौक-चौराहो पर चर्चा रहती है कि सीएमओ एवं डॉक्टर चौरिया के बीच गहरी मित्रता है, इस वजह से स्वच्छता सर्वेक्षण में ब्रांड एम्बेसडर डॉक्टर चौरिया को बनाया गया गया था।

खैर बात वही पहली वाली कि यदि कोई गम्भीर या दर्द से कराहता मरीज क्लिनिक पर आये तो संवेदना की भावना दिखाते हुए पहले उसका इलाज हो, चिकित्सा जो कि पहले सेवा का दूसरा नाम हुआ करती थी अब अधिकांशतः व्यवसाय बनकर रह गई है।

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