रिपोर्टर मनोज कश्यप
ADM News Amla । आजादी के 75 वर्ष पश्चात भी यदि आमला शहर में उपपंजीयक की पद स्थापना नहीं हुई है तो इसे दुर्भाग्य कहा जाएगा आमला तहसील एवम शहर से करोड़ों रुपए का राजस्व शासन को प्राप्त होता है बुजुर्ग लाचार किसानों एवं संपत्ति की खरीद बिक्री करने वाले प्रत्येक आम नागरिक को छोटे-छोटे कामों के लिए बैतूल और मुलताई जाना होता है यदि किसी बुजुर्ग को वसीयत बनानी हो संपत्ति दान करनी हो उनसे चलना फिरना नहीं होता इसके बावजूद भी बैतूल या मुलताई जाना होता है जहां पर पहले से ही पंजीयन कराने की काफी भीड़ होती है, ई सर्विस के माध्यम से दस्तावेजों का पंजीयन होता है स्लॉट बुक करने होते हैं उसके बाद उपपंजीयक कार्यालय के समक्ष उपस्थित होकर रजिस्ट्री करानी होती है यह व्यवस्था आमला तहसील में भी शुरू की जा सकती है लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता आम आदमी की जागरूकता की कमी की वजह से यह कार्य शासन के द्वारा अभी तक नहीं किया गया है जब भी रजिस्ट्री कर्ता दस्तावेज पंजीयन के लिए बुजुर्गों को लेकर बैतूल जाते हैं काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है कभी-कभी सर्वर डाउन हो जाता है पुनः दूसरे दिन जाना पड़ता है वकील राजेंद्र उपाध्याय का कहना है कि वह विगत कई वर्षों से लगातार शासन से इस संबंध में मांग कर रहे हैं उन्होंने ज्ञापन देकर प्रशासन से लगातार कोशिश की जा रही है वकील आर के देशमुख का कहना है कि वह स्वयं कमिश्नर नर्मदापुरम से मिलकर इस समस्या के निदान के लिए कोशिश कर चुके हैं रजिस्ट्री का काम करने वाले वकील दिलीप सोनी का कहना है कि यदि यह व्यवस्था आमला में हो जाती है तो शासन के राजस्व में और बढ़ोतरी हो सकती है प्रशासन के पास यदि बिल्डिंग की समस्या है तो जनपद चौक के पास स्थित नगर पालिका के पुराने स्कूल में या तहसील परिसर में फिलहाल उपपंजीयक कार्यालय प्रारंभ किया जा सकता है विभिन्न सामाजिक संगठनों की द्वारा शासन से इस संबंध में ज्ञापन के माध्यम से लगातार मांग की जा रही है ।






