Saturday, August 15, 2026
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आमला । सूदखोरी का आतंक: 1 लाख के कर्ज के बदले आदिवासी का ट्रैक्टर हड़पने की साजिश। ब्याजखोरी का ‘खूनी’ जाल: रेंगाढाना के युवक को कम ब्याज का झांसा देकर लिखवा लिया ट्रैक्टर का बिक्रीनामा, रसूखदारों के हौसले बुलंद

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 | ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों सूदखोरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे गरीब और अनपढ़ ग्रामीणों का खून चूसने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। शासन-प्रशासन के सख्त निर्देशों और नियमों को ताक पर रखकर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में मनमाने तरीके से ब्याज की वसूली का काला खेल धड़ल्ले से चल रहा है। ताजा मामला ब्लॉक के रेंगाढाना ग्राम से सामने आया है, जहाँ शिक्षा के अभाव और मजबूरी का फायदा उठाकर एक आदिवासी युवक को कर्ज के जाल में ऐसा फंसाया गया कि वह अपनी आजीविका का एकमात्र साधन ‘ट्रैक्टर’ ही गंवा बैठा।

मजबूरी का फायदा: किस्त भरने के लिए लिया था कर्ज

जानकारी के अनुसार, ग्राम रेंगाढाना निवासी एक आदिवासी युवक को करीब चार माह पूर्व अपने ट्रैक्टर की बैंक किस्त जमा करने के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी। इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए ग्राम बेहड़ी निवासी शिवकिशोर यादव (पिता ढीमर यादव) और उसके साथी निलेश यादव (पिता शिवपाल यादव, निवासी रतेड़ाखुर्द) ने युवक से संपर्क किया। सूदखोरों ने बड़ी ही चतुराई से युवक को कम ब्याज दर का प्रलोभन दिया और उसे 1 लाख रुपए की नकद राशि उधार दे दी।

धोखे की पटकथा: गारंटी के नाम पर बना लिया ‘बिक्रीनामा’

आदिवासी युवक को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि यह 1 लाख रुपए उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित होंगे। उधार दी गई राशि की सुरक्षा (गारंटी) के नाम पर शिवकिशोर और निलेश यादव ने युवक को विश्वास में लिया। उन्होंने कहा कि जब तक पैसे वापस नहीं होते, तब तक कागजी कार्रवाई के तौर पर ट्रैक्टर को उनके पास गारंटी रखना होगा। लेकिन असलियत में, सूदखोरों ने गारंटी के बजाय ट्रैक्टर का ‘बिक्रीनामा’ तैयार करवा लिया।

रुपये चुकाने के बाद भी नहीं लौटाया ट्रैक्टर

आर्थिक तंगी और मानसिक उत्पीड़न से परेशान होकर युवक ने जैसे-तैसे 1 लाख 25 हजार रुपये की राशि जुटाई और नगद भुगतान कर अपना ट्रैक्टर वापस मांगा। इस दौरान लेन-देन का फोटो भी सबूत के तौर पर लिया गया और अधिवक्ता के माध्यम से दस्तावेज भी तैयार कराए गए। हैरानी की बात यह है कि पूरी रकम लेने के बाद भी आरोपी अब अतिरिक्त 25 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं और ट्रैक्टर वापस करने से साफ इनकार कर रहे हैं।

खुद कमाई कर रहे, फिर भी मांग रहे ब्याज

पीड़ित का आरोप है कि पिछले चार महीनों से आरोपियों ने उसके ट्रैक्टर पर कब्जा कर रखा है। इस दौरान उन्होंने ट्रैक्टर का उपयोग कर करीब 70 से 80 हजार रुपये की कमाई खुद की है। एक लाख रुपये के कर्ज पर 25 हजार ब्याज लेने के बाद भी अतिरिक्त 25 हजार की मांग करना यह साफ दर्शाता है कि आरोपियों की मंशा केवल ब्याज वसूलना नहीं, बल्कि ट्रैक्टर पर पूर्ण रूप से कब्जा करना है।

ग्रामीणों का खुलासा: कई लोगों को बना चुके शिकार

स्थानीय ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शिवकिशोर और निलेश का यह पुराना धंधा है। वे मुख्य रूप से उन लोगों को अपना शिकार बनाते हैं जिन्हें पैसों की अति आवश्यकता होती है या जो कम पढ़े-लिखे होते हैं। ये लोग कीमती जेवर या वाहन गिरवी रखकर बिक्रीनामा लिखवा लेते हैं और बाद में मनमानी वसूली करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, आरोपी अक्सर यह कहकर धमकाते हैं कि उन्हें रसूखदारों का संरक्षण प्राप्त है और वे कानून से ऊपर हैं। फिलहाल, पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में जुट गई है।

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