बैतूल । मप्र राज्य। न्यायालय के फैसलो में कहा गया हैं कि यदि चैंक
पर हस्ताक्षर भिन्न हैं, यदि चैंक का स्टाप पेमेन्ट हैं और यदि
अपर्याप्त निधि हैं तो चैंक अनादरण का मामला धारा 138 परक्राम्य लिखत
अधिनियम 1881 के दायरे में आयेगा। इसके बावजूद आरोपी के लिए अपना बचाव करना संभव
हैं।
चैंक धारक यदि धमकी देता हैं कि मै चैंक को भुगतान हेतु पेश कर दूंगा
और चैंक खाली चैंक हैं जिसे हस्ताक्षर युक्त रिक्त चैंक कहते हैं तो आप क्या कर
सकते हैं? चैंक भुगतान हेतु पेश करने से पहले बहुत कुछ किया जा सकता हैं जो कि
आगे जाकर बचाव के लिए काम आयेगा। सबसे पहले हिसाब पूछना चाहिए कि बताओं तुम्हार
कितना पैसा निकलता हैं और किस तरह से इतना पैसा बनता हैं? चैंक धारक से
लिखित में हिसाब लेना चाहिए। फोन पर बातो की रिकार्डिंग करना चाहिए। पेशेवर साहूकारी
करने वाला जो कि कम पैसा देकर ज्यादा पैसा वसूल करता हैं वह फोन पर बात नहीं करेगा
और आपके साथ बैंठकर हिसाब नहीं करेगा तथा हिसाब लिखकर नहीं देगा। चैंक जारीकर्ता
को चाहिए कि चैंक नम्बर के साथ एक लिखित आवेदन पत्र तैयार कर बैंक में जाकर स्टॉप
पेमेंट कर देना चाहिए जिसमें यह लिखना चाहिए कि चैंक धारक मुझे ज्यादा राशि भरकर
भुगतान हेतु पेश करने और चैंक बांउस का मुकदमा चलाने की धमकी दे रहा हैं। चैंक बुक
के बाकी चैंको को बाजार में चला देना चाहिए, छोटी छोटी रकम
के चैंक बाजार में चला देना चाहिए। इसका लाभ आगे जाकर मिलता हैं।
मानलो कि चैंक धारक ने चैंक बांउस करवा लिया हैं जिसकी सूचना फोन पर
आ जाती हैं तो सबसे पहले चैंक जारीकर्ता को चाहिए कि वह अधिवक्ता के माध्यम से
नोटिस देकर आरोप लगाए कि आपके और मेरे बीच हिसाब हुआ था जिसमें 01
लाख 50 हजार रू0 की वसूली योग्य राशि निकलती थी लेकिन आपने चैंक पर 03
लाख रू0 लिखकर बाउंस करवाया हैं। आपके पास मेरे तीन चैंक रखे हैं जिसका चैंक
नम्बर यह हैं। चैंक का झूठा मुकदमा चलाना अपराध हैं। मेरे चैंक मुझे लौटा दें। यह
स्थिति तब हैं जबकि चैंक धारक ने चैंक बांउस होने पर चैंक राशि की मांग का नोटिस
नहीं दिया था।
दूसरी स्थिति पर विचार करें कि यदि चैंक धारक ने चैंक बांउस पर मांग
सूचना पत्र चैंक जारीकर्ता को भेज दिया हैं तब क्या करना हैं? चैंक
बांउस में आरोपी की ओर से पैरवी करने वाले अभ्यस्थ अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस का
जवाब दे और वही सब बाते लिखे जैसा कि उपर बताया गया हैं। नोटिस का जवाब में 07
दिवस में अनादरित चैंक के साथ अन्य चैंक, स्टांप पेपर लौटाने का कहे। चैंक के दुरूपयोग
की पुलिस में शिकायत अवश्य करें। इसका लाभ आगे जाकर मिलता हैं।
चैंक बांउस के मामलो में यह देखने में आता हैं कि चैंक जारीकर्ता
उपरोक्त काम नहीं करता हैं जिसके कारण वह न्यायालय में स्वयं को निर्दोष साबित
नहीं कर पाता हैं। चैंक बांउस मामलो में बचाव दस्तावेजो के माध्यम से किया जाता
हैं।
चैंक बाउंस का मामला अदालत में पेश कर दिया गया हैं तब क्या करना
चाहिए? यदि आप पेशी पर नहीं गए हैं और न्यायालय से समंस मिला हैं, बुलावा
आया हैं तो सबसे पहले एक नोटिस उपरोक्त बाते लिखकर दे दे और पुलिस में रिपोर्ट कर
दे। यदि जमानत करवाली हैं तो तत्काल एक नोटिस अधिवक्ता के माध्यम से दे दे और
पुलिस में रिपोर्ट कर दे जिसमें कहे कि झूठा मुकदमा कर दिया हैं। पुलिस मामले में
जॉच करेगी दोनो पक्षों के ब्यान दर्ज करेंगी। इसके बाद धारा 156 (3) में
न्यायालय में परिवादी के विरूद्ध मुकदमा पेश कर दें जिसमें बताए कि चैंक पर मेरे
केवल हस्ताक्षर हैं बाकी की इबारत मैने नहीं लिखी हैं, विधि विज्ञान
प्रयोगशाला से इसकी जॉच करवा ले। कानून में चैंक धारक को चैंक की प्रविष्टियों को
लिखने का अधिकार हैं लेकिन मनमानी रकम लिखने का अधिकार नहीं हैं। न्यायालय में
धारा 340 दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 में परिवाद पेश किया जा सकता हैं जिसमें झूठा
मुकदमा पेश करना, झूठा साक्ष्य पेश करना अपराध हैं। न्यायालय में धारा 91 का
आवेदन कर अन्य चैंक पेश करने के लिए कहना चाहिए जिसमें न्यायालय अन्य चैंक पेश
करने के लिए परिवादी को निर्देश दे सकती हैं।
चैंक बांउस के मामलों में परिवादी के पक्ष में कानून हैं, चैंक
राशि परिवादी को प्राप्त होना चाहिए, यह एक आसान काम हैं जिसके लिए कोई भी अधिवक्ता
काम कर लेता हैं। चैंक बांउस के मामलों में जमानत आसानी से हो जाती हैं लेकिन
मुकदमे में जब गवाही की पारी आती हैं तो ज्यादातर वकील केस छोड़ देते हैं या फिर
अन्य सिविल या क्रिमिनल मामलों की तरह पैरवी करते हैं जिसके कारण आरोपी को
दोषसिद्धि हो जाती हैं।
चैंक बांउस कानून एंक विशेष कानून हैं जिसमें मुकदमा दस्तावेजो पर
चलता हैं और दस्तावेजो पर ही बचाव लिया जाता हैं। न्यायालय में आरोपी को दस्तावेजो
को पेश करने बचाव लेना होता हैं। इसके लिए कोई कठोर नियम नहीं हैं लेकिन वह
दस्तावेज कौन से होगे? यह मुकदमा दर मुकदमा बदलता रहता हैं।
चैंक बाउंस के मामलों में आरोपी को चाहिए कि वह योग्य अधिवक्ता
नियुक्त करें जो कि बचाव पक्ष से पैरवी करने का अभ्यस्त हैं। जिला न्यायालय में
चैंक बांउस कानून के विशेषज्ञ अधिवक्ता होते हैं, उनसे मामले में
पैरवी करवाना चाहिए। चैंक का दुरूपयोग बैंक एवं फायनेंस कंपनिया भी करती हैं।
सरकारी योजनाओं में लिया गया ऋण की वसूली के लिए चैंक का दुरूपयोग बैंक करता हैं।
फायनेंस कंपनिया मोटर गाड़ी जप्त करने के बाद चैंक बाउंस का मुकदमा लेकर आती हैं।
प्रधान मंत्री रोजगार योजना में बैंक ने ऋण दिया था और अब वसूली के
चैंक बांउस का मुकदमा लेकर बैंक आ गया हैं। पैरवी करने वाले अधिवक्ता को पता होना
चाहिए कि प्रधान मंत्री रोजगार योजना क्या हैं? तभी बचाव संभव
हैं। फायनेंस कंपनी ने मोटर गाड़ी जप्त कर ली हैं और चैंक बांउस का मुकदमा आ गया
हैं तो अधिवक्ता को पता होना चाहिए कि फायनेंस कंपनी के एग्रीमेंट क्या था?
फायनेंस
कंपनी ने गलती कौन सी करी हैं? इसलिए योग्य अधिवक्ता का चयन करना चाहिए अन्यथा
दोषसिद्धि तय हैं।
न्यायालय में चैंक बांउस का मुकदमें में अंतिम बहस के दौरान
न्यायदृष्टांत पेश अवश्य करना चाहिए। लिखित बहस जो कि न्यायदृष्टांतो पर आधारित
हैं, उसे पेश करना चाहिए तो विचारण न्यायालय से लाभ मिलने की संभावना रहती
हैं।
चैंक बांउस के मामलों में अक्सर न्यायालय से गलत दोषसिद्धि हो जाती
हैं जिसका आधार चैंक पर हस्ताक्षर हैं। यह
ठीक वैसा ही हैं कि किसी महिला ने पुरूष पर दुराचार का आरोप लगाया हैं तो किसी
व्यक्ति का पुरूष होना ही दुराचार के अपराध में दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त हैं।
कानून एैसा नहीं हैं बल्कि चैंक बांउस में बचाव किया जा सकता हैं। भारत की सुप्रीम
कोर्ट के न्यायदृष्टांत बताते हैं कि चैक बाउंस के आरोपी को अपना बचाव कैसे करना
हैं?
Bharat Sen Advocate Chamber No 24, Civil Court BETUL (MP)
9827306273


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