बैतूल। ( कौशल घोडके ) शासकीय पी.एम.श्री हाईस्कूल भयावाड़ी, विकासखंड शाहपुर में पदस्थ शिक्षिका लीना रायकवार के जाति प्रमाण पत्र की जांच के संबंध में सहायक आयुक्त, जनजाति कार्य विभाग को ज्ञापन सौंपा गया है। आवेदक आकाश कुदारे पिता रामकिशोर कुदारे ने बताया कि शिक्षिका लीना रायकवार वर्ष 2007 में संविदा शाला शिक्षक वर्ग-2 के पद पर तीन वर्ष के लिए नियुक्त हुई थीं। नियुक्ति के समय उन्होंने नायब तहसीलदार, आमला द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था, जबकि नियुक्ति आदेश की शर्त क्रमांक 11 के अनुसार, अनिवार्य रूप से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा जारी स्थायी जाति प्रमाण पत्र 6 माह के भीतर प्रस्तुत करना आवश्यक था। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा (6)(1) के अंतर्गत कार्यालय प्राचार्य, शासकीय कन्या उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शाहपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिक्षिका के नियुक्ति दस्तावेजों में नायब तहसीलदार का जाति प्रमाण पत्र ही उपलब्ध है, जो कि नियुक्ति शर्तों का उल्लंघन माना गया है।
आवेदन में यह भी कहा गया है कि श्रीमति लीना रायकवार को आज पर्यन्त तक पदोन्नति एवं कोन्नति का लाभ शासन द्वारा नहीं दिया गया है, जबकि संविदा शिक्षक वर्ग-2 / 2007 के अन्य शिक्षकों को यह लाभ दिया गया है। साथ ही, नियुक्ति आदेश की शर्त क्रमांक 12 के अनुसार, नियोजित अभ्यर्थियों को अपने सभी मूल प्रमाण पत्रों की छायाप्रति नियुक्ति संस्था के प्राचार्य/प्रधानपाठक के पास जमा करनी होती है, लेकिन शिक्षिका द्वारा ऐसा किया गया है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
इसके अतिरिक्त, नियुक्ति आदेश की शर्त क्रमांक 9 के अनुसार, शिक्षिका के जाति प्रमाण पत्र की शीघ्र जांच की जानी चाहिए, लेकिन इसके बावजूद अब तक जांच नहीं की गई है। साथ ही, नियुक्ति आदेश की शर्त क्रमांक 10 के अनुसार, नियोजित अभ्यर्थियों के चरित्र का पुलिस सत्यापन भी आवश्यक है, परंतु शिक्षिका का पुलिस सत्यापन करवाया गया है या नहीं, इस पर भी सवाल उठाए गए हैं।
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि शिक्षिका लीना रायकवार के खिलाफ 14 मार्च 2025 को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम 1989 (संशोधन 2015) की धारा 3(1)(द), 3(1)(घ), 3(2)(va) और भारतीय न्याय संहिता (बी.एन.एस.) 2023 की धारा 296, 115(2), 3(5) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। ऐसे में उनकी नियुक्ति और दस्तावेजों की विस्तृत जांच की मांग की गई है।
ज्ञापन के साथ नायब तहसीलदार द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, नियुक्ति आदेश, तथा 14 मार्च 2025 को दर्ज एफआईआर की छाया प्रति भी संलग्न की गई है।।आवेदक ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर उचित जांच नहीं की गई तो वे न्यायालय की शरण लेंगे। उन्होंने उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की मांग की है।





