Saturday, August 15, 2026
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वनमंडल अन्तर्गत विगत 03 वर्षों में अथक प्रयासों से नवाचार में मिली अभूतपूर्व उपलब्धियों

बैतूल ( कौशल घोड़के) दक्षिण बैतूल (सा.) वनमंडल अन्तर्गत विगत 03 वर्षों में अथक प्रयासों से नवाचार में मिली अभूतपूर्व उपलब्धियों

वनमंडलाधिकारी, दक्षिण बैतूल (सा.) वनमंडल, श्री विजयानन्तम टी.आर. (भा.व.से.) के मार्गदर्शन में वनमंडल अंतर्गत वनक्षेत्रों में पदस्थ वन कर्मचारियों/अधिकारियों के दल गठित कर नियमित रूप से गश्ती अभियान चलाया गया, जिससे वन अपराध प्रकरणों में अत्यंत कमी आयी है।

वर्ष 2022 से अप्रैल 2025 तक विभिन्न प्रकार की अवैध गतिविधियों में संलिप्त चार पहिया 43 वाहन, 03 पहिया 01 वाहन, 02 पहिया 37 वाहन, 05 साईकिल एवं 01 मानव चलित नाव चप्पू सहित जप्त की गई। अवैध सागौन ल‌ट्ठा/बल्ली 5757 नग 136.897 घ.मी. जिसका अनुमानित बाजार मूल्य 6770962/- एवं 91.923 घ.मी. रेत जिसका अनुमानित बाजार मूल्य 260127/- है।

वनमंडलाधिकारी द्वारा अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने हेतु वनमंडल अंतर्गत विभिन्न नवाचार जैसे- वनमंडल स्तर पर कंट्रोलरूम स्थापित करना, वन समिति सदस्यों के बच्चों युवाओं के कौशल उन्नयन कर स्वरोजगार से जोड़ना, ईको टूरिज्म स्थल सापना एवं कुकरू का जीर्णोद्धार, वन समितियों के माध्यम स्कूली छात्र-छात्राओं हेतु स्मार्ट क्लासेस की स्थापना इत्यादि कार्य किये गये है। वनमंडल अंतर्गत ईको टूरिज्म स्थल कुकरू में पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। ईकोटूरिज्म स्थल पर पर्यटकों द्वारा कमरे आरक्षित करने में ईकोटूरिज्म स्थल कुकरू प्रदेश में प्रथम स्थान पर है।

वन एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण हेतु प्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व बैतूल जिले में ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व के रूप में घोषित किया गया, जिसमें वनमंडलाधिकारी दक्षिण बैतूल (सा.) वनमंडल, श्री विजयानन्तम टी.आर. (भा.व.से.) की अहम भूमिका रही।

वन एवं वन्यप्राणियों की सुरक्षा हेतु क्षेत्रीय वन कर्मचारियों को प्रेरित करने के लिए उन्हें मूलभूत सुविधाएं जैसे-आवास, बिजली, पानी, प्रदान की गई, जिससे वन अमले का मनोबल बढ़ा जिसका परिणाम वन में कर्मचारियों की सक्रियता परिलक्षित होने लगी। वनचौकियों को सुदृढ़ किया गया। अवैध गतिविधियों में संलिप्त अंतर्राज्जीय गिरोह के विरूद्ध कार्यवाहीः- वनमंडल के अंतर्गत ताप्ती

परिक्षेत्र की बीट गौनीघाट एवं महुपानी में अवैध कटाई की सूचना प्राप्त होने पर परिक्षेत्र स्तर पर टीम गठित कर, उक्त बीटों के संपूर्ण कम्पार्टमेंट की विस्तृत जांच करने हेतु निर्देशित किया गया। टीम द्वारा वन क्षेत्र में स्थित मोबाईल टावर से प्राप्त डेटा के आधार पर संलग्न अपराधियों के मोबाईल कॉल डिटेक्ट प्राप्त किये गये। गठित टीम द्वारा मुख्य आरोपी श्री विष्णु वल्द भूरा पिपरदे तह. हरसूद जिला खण्डवा को गिरफ्तार किया गया जांच के दौरान आरोपी के कथन अनुसार उक्त अवैध काष्ठ महुपानी जंगल से काटकर भीलवाडा राजस्थान परिवहन होने से टीम द्वारा आरोपी के निशानदेही पर बैतूल से राजस्थान ले जाकर अन्य आरोपी आरामशीन संचालक श्री रामेश्वर लाल वल्द मोहन सुधार (बढाई) साकिन हरिपुरा तह. मॉडल जिला भीलवाडा (राजस्थान) को गिरफ्तार कर जप्त वनोपज को बैतूल लाया गया। आरोपियों को माननीय न्यायालय में ज्यूडिसियल रिमांड पर लेकर प्रकरण की विवेचना की गई।

दिनांक 28.03.2023 को रात्रि में मुख्य वन संरक्षक बैतूल को मुखबीर द्वारा प्राप्त सूचना के आधार पर उड़नदस्ता दल बैतूल को दिये निर्देश अनुसार बैतूल से मुलताई मार्ग पर वाहन में अवैध परिवहन कर रहा है। तत्काल उड़नदस्ता द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग 47 बैतूल से नागपुर मार्ग पर मुलताई के पास एक महिन्द्रा ट्रक क्रमांक MH-40-CM-3604 को चेक करने पर वाहन में सागौन के अवैध लठ्ठे भरे पाये गये। वाहन चालक से पूछने पर कोई वैध कागजात नहीं होने से वाहन को जप्त कर वनमंडल के परिक्षेत्र ताप्ती (सा.) केम्पस में लाया गया तथा उक्त काष्ठ का मेजरमेंट करने पर सागौन नग 88-5.101 घ.मी. वनोपज पाई गई। जिसका वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया तथा परिक्षेत्र अधिकारी मुलताई (सा.) को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया एवं टीम गठित करने हेतु निर्देशित किया गया। प्रकरण में आरोपी श्री राजा भाई केवट तथा सह आरोपी वसीम अहमद निवासी नर्मदापुरम से पुछताछ कर विवेचना की गई। प्रकरण में वाहन चालक से पुछताछ पर उनके द्वारा श्री सांई श्रीनिवासा सॉ मिल एवं टिम्बर डिपों बेडाचेरपल्ली (सिद्धीपेठ तेलंगाना) को उक्त वनोपज परिवहन कर पहुंचा रहे थे बयान दिया गया। उक्त वनोपज का बिल एवं टी.पी. होशंगाबाद से बेडाचेपल्ली (सिद्धीपेठ तेलंगाना) के नाम से कटी हुई पाई गई। इस संबंध में संबंधित फर्म का निरीक्षण कर जारी फर्जी टी.पी., बिल इत्यादि आवश्यक अभिलेख एवं जानकारी उपलब्ध कराने हेतु वनमंडलाधिकारी सिद्धीपेठ तेलंगाना को लेख किया गया।

प्रकरण में उक्त वन अपराध की विवेचना उपरांत चिचोली निवासी महेन्द्र पिता मदन कटारे द्वारा सगौन काष्ठ कटाई की जाना पाया गया साथ ही राजा भाई केवट के पास फर्जी टी.पी. एवं फर्जी बिल पाए गए। पाई गई अवैध काष्ठ में से कुछ काष्ठ आरोपी के बयान अनुसार वसीम अहमद पिता तसीन चंदन नगर रसुलिया के फर्नीचर दुकान की होना बताया गया। जिसके उपरांत दुकान पर छापा मारकर दुकान सील कर दी गई। जांच कर्ता अधिकारी द्वारा की गई विस्तृत जांच में पाया गया कि संबंधित आरोपी द्वारा उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र एवं तेलंगाना राज्य में अवैध काष्ठ कटाई एवं अवैध परिवहन संबंधी कार्य किया जा रहा था। अन्तर्राज्यीय तस्कर गिरोह के खिलाफ थाना मुलताई में भी जाली टी.पी.एवं फर्जी बिल के संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज की गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण में विधिवत कार्यवाही कर आरोपी श्री राजा भाई केवट पिता राम सनेही, उम्र 40 वर्ष, साकिन दुर्गा वार्ड बैतूल जिला बैतूल एवं वसीम अहमद पिता तसीन, उम्र 37 वर्ष चंदन नगर रसूलिया, नया हनुमान नगर नर्मदापुरम (होशंगाबाद) को माननीय न्यायालय मुलताई में प्रस्तुत किया गया। माननीय न्यायालय मुलताई द्वारा इस प्रकरण में संलिप्त दोनों आरोपियों को उपजेल मुलताई भेजा गया। वन विकास से ग्राम विकास की थीम पर वनमंडल अंतर्गत अतिक्रमित क्षेत्र में शांतिपूर्वक अतिक्रमणकारियों को समझाईश देकर एवं वन समिति के माध्यम से अतिक्रमणकारियों ग्रामीणों एवं स्वसहायता समूहों की बैठक लेकर 105 हे० वनक्षेत्र से अतिक्रमण हटाकर सफलतापूर्वक वृक्षारोपण किया गया।

वृत्त अंतर्गत वन सेवा कार्य के दौरान शहीद हुए वनकर्मियों जिन्होंने वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण के लिए अपना योगदान दिया। उनकी स्मृति में वन विद्यालय बैतूल प्रांगण में वनशहीद स्मारक का निर्माण कराने में, श्री विजयानन्तम टी.आर. (भा.व.से.) संचालक, वन विद्यालय बैतूल के रूप में अहम भूमिका रही। पक्षी सर्वेक्षणः- वनमंडल अंतर्गत पाये जाने वाले पक्षियों के बारे में और अधिक जानने के लिए 19 जून से लेकर 24 जून, 2024 तक दक्षिण बैतूल (सा.) वनमंडल के विभिन्न परिक्षेत्रों आमला, ताप्ती, भैसदेही एवं सावलमेंढा (सा.) में पक्षी सर्वेक्षण किया गया, जिससे की स्थानीय पक्षियों के साथ-साथ गर्मियों के मौसम में आने वाले प्रवासी पक्षियों को भी रिकॉर्ड किया जा सके। पक्षी सर्वेक्षण में दस्तावेजीकरण के लिए eBird एप्प का उपयोग किया गया। सर्वेक्षण के दौरान कुल 144 पक्षी प्रजातियों को रिकॉर्ड किया गया, जिसमे से कई पक्षी प्रजतियों ऐसी भी है जो मध्यप्रदेश में बहुत कम जगहों पर देखी गयी है। इनमें से 12 प्रजाति के पक्षी प्रवासी पक्षी है जो गर्मियों के मौसम में आ गए थे। कुक्कू परिवार के पक्षी दूसरे प्रजाति के पक्षियों के घोंसलों में अंडे देने के लिए जाना जाता है। कुक्कू परिवार के 08 प्रजातियों को रिकॉर्ड किया गया। जिनमे बैंडेड वे कुक्कू और फोर्क टेल्ड ड्रॉगो कुक्कू भी शामिल है। इसके अलावा “वाटरकाक” हेयर क्रेस्टेड ड्रांगों” और “रडी-ब्रेस्टेड क्रेक” पक्षी इबर्ड पर बैतूल से पहली बार रिकॉर्ड किये गए है। इसके अलावा ओरिएण्टल प्रेटिनकोल प्रजाति के पक्षी छोटे बच्चों के साथ दिखाई दिए। जिससे पता चलता है की जिले के वेटलैंड्स इनके प्रजनन के लिए अनुकूल पर्यावास है। यह पक्षी भी बैतूल जिले से इबर्ड पर पहली बार रिकॉर्ड हुए है। 144 पक्षियों की इस सूचि में कुछ पक्षी ऐसे भी है जो आई. यु. सी. एन. की संकटग्रस्त प्रजतियों की सूचि में शामिल है।

तितली सर्वेक्षणः- वनमंडलाधिकारी दक्षिण बैतूल (सा.) वनमंडल श्री विजयानन्तम टी.आर. (मा.व.से.) की पहल पर बैतूल में पाए जाने वाली रंग-बिरंगी तितलियों के बारे में और अधिक जानने के लिए 19 जून से लेकर 24 जून 2024 तक दक्षिण बैतूल (सा.) वनमंडल के अंतर्गत रंग-बिरंगी तितलियों का सर्वेक्षण किया गया।

किसी भी जगह तितलियों की समृद्धता पर्यावरणीय कारकों जैसे आर्द्रता, तापमान और लार्वा होस्ट पौधों की उपलब्धता से प्रभावित होती है, क्योंकि तितलियाँ केवल विशिष्ट पौधों पर ही अंडे देती हैं जिन्हें लार्वा होस्ट पौधे कहा जाता है। बैतूल की प्राकृतिक सुंदरता में यहाँ के जंगल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। यहाँ के जंगलों के विविध प्रकार के पेड़-पौधे कई प्रकार की तितलियों को आकर्षित करते है। वनमंडल अंतर्गत किये गये सर्वेक्षण में हेस्पेरिडे परिवार की स्पॉटेड स्मॉल फ्लैट तितली भी देखी गई, जो की सिटीजन साइंस के रिकॉर्डस के आधार पर अब तक सिर्फ पचमढ़ी में ही रिकॉर्ड की गयी थी। इसका बैतूल में मिलना यह संकेत है की बैतूल में तितलियों की और भी कई असमान्य प्रजातियों के मिलने की सम्भावना है। इनके आलावा स्लेट फ़्लैश कॉमन ट्रीब्राउन, कॉमन शॉट सिल्वरलाइन, कॉमन पॉमफ्लॉय, डबल बैंडेड जुडी, कॉमन थ्री-रिंग, कॉमन हेज ब्लू, कॉमन माइम स्वैलोटेल इत्यादि शामिल है। सर्वेक्षण में तितलियों की प्रजातियों का दस्तावेजीकरण भी किया गया, जिससे तितलियों के बेसलाइन डाटा को समृद्ध किया जा सके, साथ ही साथ तितलियों और उनके पारिस्थितिक महत्व के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाई जा सके।

हम अपने घरों के आसपास ही कई प्रकार की तितलियाँ देखी जा सकती है, चट्टानों पर धूप सेंकते हुए, फूलों का रस पीते हुए, मिट्टी के गीले हिस्से पर बैठे हुए या खनिज और लवण चूसते हुए। भारत समृद्ध जैव विविधता वाले देशों में से एक है, जहाँ दुनिया भर में पायी जाने वाली लगभग 17,000 तितली प्रजातियों में से लगभग 1500 प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिनमे से कई स्थानिक है अर्थात जो भारत के अलावा कहीं और नहीं पायी जाती है, जिसके कारण भारत दुनिया में तितली विविधता का एक हॉटस्पॉट है। मध्यप्रदेश में 150 से भी ज्यादा प्रजतियों की तितलियों को रिकॉर्ड किया गया है।

कौशल उन्नयन कार्यक्रमः ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने हेतु दक्षिण बैतूल (सा.) वनमंडल द्वारा मिशन वनवीर के तहत “वन विकास से ग्राम विकास” थीम पर कौशल उन्नयन प्रशिक्षण वन विद्यालय बैतूल में आयोजित किया गया। वनमंडल अंतर्गत वर्ष 2025 तक कुल 470 वन समिति सदस्यों को कौशल उन्नयन प्रशिक्षण जैसे लाइट मोटर व्हीकल ड्रायविंग, सिलाई एवं मेकरम प्रशिक्षण, इलेक्ट्रिशियन, इंग्लिश स्पोकन प्रशिक्षण एवं बेसिक कम्प्यूटर प्रशिक्षण प्रदान कर 257 युवाओं को विभिन्न कंपनियों में मासिक वेतन रू. 15000-20000 प्रतिमाह पर प्लेसमेंट भी प्रदान किया गया साथ ही 130 युवा प्रशिक्षण उपरांत स्वरोजगार से जुड़े है, जिससे उनकी आजीविका एवं आर्थिक स्तर में सुधार आया है।

वन अग्नि नियंत्रणः वनमंडलाधिकारी के मार्गदर्शन में वनों की आग से सुरक्षा हेतु किये गये विशेष प्रयासो से वनअग्नि की घटनाओं में कमी आयी है। वनों को आग से बचाने हेतु फायर सीजन प्रारंभ होने के पूर्व ही वनमंडलाधिकारी द्वारा फायर लाइन साफ-सफाई एवं जलाने का कार्य प्रारंभ करने हेतु क्षेत्रीय वनकर्मचारियों को निर्देशित किया गया। वनमंडलाधिकारी द्वारा वनमंडल अंतर्गत समस्त वनसुरक्षा एवं ग्राम वन समितियों की विशेष अग्नि सुरक्षा बैठके आयोजित की गई जिसमें ग्रामवासियो को वनों को आग से बचाने हेतु प्रेरित किया गया। वन अग्नि की त्वरित सूचना के आदान-प्रदान एवं दूरदराज के वनक्षेत्रो में आग की सूचना प्रेषित करने हेतु वनमंडल स्तर पर ‘फायर कंट्रोल सेंटर” स्थापित किया गया जो कि 24 घंटे कार्यरत रहा। जिस कारण वन अग्नि की सूचना तत्काल संबंधित बीट में पदस्थ वन कर्मचारियों को प्राप्त हो जाती थी जिससे कम से कम समय में आग पर काबू पाया जा सका। आग पर काबू पाने हेतु प्रत्येक परिक्षेत्र का ब्लोअर भी प्रदान किये गये जिससे आग पर काबू पाने में आसानी हुई वन कर्मचारियों को इस हेतु प्रशिक्षण भी दिया गया।

कार्यालय प्रबंधनः- वनमंडल अंतर्गत वन सुरक्षा, वन वर्धन, अधोसंरचना विकास एवं वन विकास आदि क्षेत्रों में किये गये उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख द्वारा ISO 9001-2015 गुणवत्ता प्रबंधन के मानकों एवं ISO14001-2015 पर्यावरण प्रबंधन के मानको को पूर्ण करने पर दक्षिण बैतूल (सा.) वनमंडल को ISO प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया है।

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