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सूदखोर ने फर्जी दस्तावेज बनाकर अपने नाम कर ली जमीन

ब्याज से पैसे देने के विवाद में प्रवीण गुगनानी के खिलाफ गंज थाने में शिकायत
सूदखोर ने फर्जी दस्तावेज बनाकर अपने नाम कर ली जमीन
आवेदक ने 18 लाख ब्याज सहित चुकाने के बावजूद झूठा वाद पेश करने का लगाया आरोप
रिपोर्टर – कौशल कुमार घोड़के
News Betul। घोड़ाडोंगरी तहसील अंतर्गत आने वाले दो युवकों ने व्यापारी प्रवीण गुगनानी के खिलाफ कूट रचित दस्तावेज के आधार पर उनकी जमीन अपने नाम करवाने एवं झूठा वाद पेश करने का आरोप लगाया। शिकायतकर्ता प्रमोद मालवीय पिता महेश मालवीय, आभाष मिश्रा पिता विजयकांत मिश्रा ने गंज थाने में सौंपे शिकायत आवेदन में अनावेदक प्रवीण गुगनानी निवासी बैतूल गंज के खिलाफ कार्यवाही करने एवं अनावेदक से स्टाम्प, 7 चैक एवं वाउचर वापस दिलाने की मांग की है। शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने 3 साल पहले 3 प्रतिशत की दर से 20 लाख रुपए ब्याज पर लिए थे। 18 लाख मूलधन एवं ब्याज की राशि चुकता करने के बावजूद अनावेदक ने कुटरचित दस्तावेज के आधार पर उनकी लाखों की जमीन अपने नाम कर ली है, अनावेदको का कहना है कि उन्हें प्रवीण गुगनानी को 2 लाख मूलधन और ब्याज की राशि देना है, इसके लिए उन्होंने प्रवीण गुगनानी से 6 माह का समय देने का आग्रह किया था। लेकिन प्रवीण गुगनानी ने ब्याज से पैसे लेने के लिए जमा किए गए दस्तावेजों का गलत उपयोग कर उनकी जमीन अपने नाम कर ली और न्यायालय में झूठा वाद भी दायर कर दिया है। इस मामले में आवेदक ने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंप कर उचित जांच कर न्याय की गुहार लगाई है।
— यह है पूरा मामला–
शिकायत आवेदन के अनुसार आवेदकगण की अनावेदक से जान पहचान रही है और आवेदकगण को यह जानकारी रही है कि अनावेदक ब्याज से पैसे देने का भी व्यवसाय करता है। आवेदकगण को अपने द्वारा रानीपुर की क्रय की गयी भूमि के विक्रेता को बीस लाख रूपये देना था इसलिए आवेदकगण को पैसों की आवश्यकता थी। आवेदकगण ने ब्याज से राशी लेने हेतु अनावेदक से दिनांक 25.06.2020 के पूर्व सम्पर्क किया और अपनी परेशानी बतायी तो अनावेदक ने कहा कि 3 प्रतिशत मासिक दर से पैसा दे दूंगा। लेकिन सिक्योरिटी बतौर अर्थात जमानत – स्वरूप पाँच-पाँच सौ रू. के दो कोरे स्टाम्प आपके हस्ताक्षर किए, 7 कोरे चैक हस्ताक्षर, करके और 10-10 कोरे वाउचर हस्ताक्षर बतौर सिक्योरिटी (सुरक्षा) देना होगा तथा आधार कार्ड की फोटो कापी भी देना होगा। जब मूलधन और ब्याज पूरा अदा कर देंगे तो दोनों स्टाम्प, 7 चैक एवं पूरें वाउचर वापिस कर दिए जायेंगे। आवेदकगण को बीस लाख रूपये की सख्त आवश्यकता थी इसलिए आवेदक क. 1 ने 500/- रू. का स्टाम्प घोडाडोंगरी से एवं आवेदक क. 2 ने 500/- का स्टाम्प बैतूल से दिनांक 25.06.2020 को खरीद कर दोनों कोरे स्टाम्पों पर आवेदकगण ने अपनी हस्ताक्षर कर अनावेदक को दिए। एवं आवेदक 1 ने दिनांक 25.06.2020 को बैंक ऑफ महाराष्ट्र शाखा घोड़ाडोंगरी के अपने खाते के अपनी हस्ताक्षर युक्त कोरे चैक क्रमांक. 008966, 008967, 008968, 008969, 007951 एवं आवेदक क. 2 ने बैंक ऑफ इंडिया के अपने हस्ताक्षर युक्त कोरे चैक क: 013306, 013307 बतौर सिक्योरिटी एवं 10-10 कोरे वाउचर आवेदकगण ने बतौर सिक्योरिटी अपनी अपनी हस्ताक्षर कर अनावेदक को दिए। तब अनावेदक ने 10-10 लाख रू. आर.टी.जी.एस. के माध्यम से आवेदकगण को दिए थे। पश्चात में अनावेदक ने आवेदकगण से कहा था कि मैं आपके प्लाट . विकय करा दूंगा आप वही पट्टा की फोटो कापी हस्ताक्षर कर दें दो खरीददारों को दिखाना पड़ेगा तो आवेदक गण ने बड़ी पट्टे की फोटो कापी पर हस्ताक्षर करके. अनावेदक को दे दिया था। आवेदकगण ने अनावेदक से 3 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से ब्याज पर बीस लाख रु. 25.06.2020 को लिए थे और आवेदकगण ने मई 2023 तक अठारह लाख रू. एवं ब्याज अनावेदक को वापिस कर दिया । शेष राशि दो लाख रू. एवं मई 2023. से अभी तक का ब्याज देना बाकी है। आवेदकगण के पास जून 2023 में पैसों की व्यवस्था ना होने के कारण आवेदकगण ने अनावेदक से निवेदन किया कि उन्हें शेष मूलधन 2 लाख रू. एवं ‘ब्याज की राशि अदा करने हेतु 6 माह का समय दो तो अनावेदक नाराज हो गया और कहने लगा कि मैं पैसे वसूल करना जानता हूँ। तुम्हारे खिलाफ झूठा केस डालकर कई गुना ज्यादा की जमीन ले लूंगा और कोरे चैक के माध्यम से भी अन्य लोगों के नाम चैक बाउंस कराकर केस डाल दूंगा और कई गुना ज्यादा राशि ले लूंगा। इसी बात का फायदा उठाकर अनावेदक ने आवेदक क. 1 द्वारा दिए कोरे स्टाम्प पर आवेदकगण की हस्ताक्षर होने का अवैध लाभ उठाकर एवं गवाहों और नोटरी से साँठ गाँठ कर दिनांक 25.06.2020 की तारीख डालकर झूठी फर्जी एवं कूटरचित व्यानां चिट्ठी बनाकर आवेदकगण के विरूद्ध झूठा वाद पेश कर दिया जबकि आवेदकगण ने कभी अपनी भूमि बेचने का सौदा अनावेदक से नहीं किया ना . ही सौदा पेठे कोई राशि आवेदकगण ने अनावेदक से प्राप्त की । ना ही आवेदकगण नोटरी के पास गए और ना ही नोटरी के रजिस्टर में आवेदकगण ने हस्ताक्षर की ना ही गवाहों या नोटरी के समक्ष आवेदकगण ने हस्ताक्षर किए। ना ही नोटरी का कमांक है ना ही आवेदकगण की फोटो है। इसलिए फर्जी ब्याना चिट्ठी की जांच भी होना चाहिए। यह कि अनावेदक के पास अभी भी आवेदकों के कोरे स्टांप और चेक रखे हुए हैं। अनावेदक उक्त स्टाम्प, कोरे चैकों एवं वाउचरों का दुरूपयोग कर सकता है और उसके आधार पर अवैध लाभ प्राप्त करने हेतु आवेदकगण के खिलाफ झूठी कार्यवाही कर सकता है या किसी अन्य से करवा सकता है इसलिए उक्त स्टाम्प, चैक एवं वाउचर आवेदकगण को वापिस दिलवाना आवश्यक है। इस मामले में शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अनावेदक उन दस्तावेजों के आधार पर कोई कार्यवाही करता है तो वह शून्य एवं अवैध होगी।
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