आमला। सरकारी तंत्र में जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और जनहित के ऊपर व्यक्तिगत अहंकार हावी हो जाए, तो खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। ताजा मामला आमला ब्लॉक की ग्राम पंचायत नांदपुर का है, जहाँ सरपंच की मनमानी और प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना ने लोकतंत्र की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। अनुविभागीय अधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, पंचायत प्रशासन अपनी हठधर्मिता से पीछे हटने को तैयार नहीं
स्थानीय ग्रामीण से प्राप्त जानकारी के अनुसार
पिछले काफी समय से गहराते जल संकट और नल-जल योजना की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा था। कुछ दिन पूर्व आक्रोशित ग्रामीणों ने पंचायत भवन में तालाबंदी कर दी थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अनुविभागीय अधिकारी शैलेंद्र बड़ोनिया ने स्वयं मौके का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि ‘न्यू कॉलोनी’ क्षेत्र में नल-जल योजना के संचालन में भारी लापरवाही बरती जा रही है। इसके लिए सीधे तौर पर पंप चालक को जिम्मेदार मानते हुए ने अनुविभागीय अधिकारी तत्काल उसे पद से हटाने के निर्देश दिए थे।
आदेश का उल्लंघन और सरपंच की नई कार्ययोजना’
प्रशासनिक अधिकारी के आदेश को नांदपुर सरपंच ने कूड़ेदान में डाल दिया है। सूत्रों के मुताबिक, आदेश का पालन करने के बजाय सरपंच कुछ प्रभावशाली ग्रामीणों और किसानों के साथ मिलकर उसी विवादित पंप चालक को पुनः नियुक्त करने की फिराक में हैं। इसके लिए बकायदा गुप्त बैठकें की जा रही हैं और एक ऐसी कार्ययोजना तैयार की जा रही है जिससे प्रशासनिक आदेश को ‘जनभावना’ का नाम देकर दबाया जा सके।
जल संकट के बीच सुलग रहे सवाल
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक नियंत्रण और सरपंचों की बढ़ती निरंकुशता को उजागर कर दिया है। जब खुद अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के निर्देशों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हों, तो आम जनता की सुनवाई कहाँ होगी? भीषण गर्मी के इस दौर में न्यू कॉलोनी और आसपास के रहवासी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जबकि पंचायत तंत्र राजनीति चमकाने और पसंदीदा लोगों को उपकृत करने में व्यस्त है। अब देखना यह है कि इस खुली अवहेलना पर एसडीएम शैलेंद्र बड़ोनिया क्या सख्त रुख अख्तियार करते हैं।
ग्रामीणों में गहरा रोष: “प्यास से मर रहे हम, राजनीति कर रही पंचायत”
स्थानीय ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पंचायत की राजनीति ने गाँव की प्यास को और बढ़ा दिया है। एक ग्रामीण ने व्यथा सुनाते हुए कहा, “जब अधिकारी ने गड़बड़ी पकड़ी और आदेश दिया, तो उसे मानना चाहिए। लेकिन यहाँ तो सरपंच अपनी सत्ता दिखा रहे हैं। पंप चालक को हटाना तो दूर, उसे बचाने के लिए किसानों को गुमराह किया जा रहा है।” ग्रामीणों का कहना है कि जल संकट के चलते उन्हें मीलों दूर से पानी लाना पड़ रहा है, जबकि पंचायत प्रशासन साठगांठ के खेल में व्यस्त है।
नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बयां किया दर्द
नल-जल व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने के लिए स्थानीय ग्रामीणों से सीधे चर्चा की, तो पंचायत राज की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हुए। गाँव के ही एक जागरूक नागरिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “पंचायत प्रशासन का पूरा ध्यान ग्रामीणों को पानी पहुँचाने पर नहीं, बल्कि अपनी मनमानी चलाने पर है। नल-जल योजना को सुचारू रूप से चलाने के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। जब एसडीएम साहब ने खुद गड़बड़ी पकड़ी और निर्देश दिए, तो उसका पालन तुरंत होना चाहिए था। लेकिन यहाँ तो अधिकारी के जाने के बाद फिर से पुराना ढर्रा चालू करने की साजिश रची जा रही है।”
पंप चालक इन स्थानीय ग्रामीणों का मिल रहा संरक्षण
ग्राम पंचायत सरपंच शीला जगदीश सोनपुर द्वारा पंप चालक से पारिवारिक रिश्ते होने के चलते शासकीय बोर के आसपास के किसानों को शासकीय बोर के 24 घंटे हेतु बिजली सप्लाई उपलब्ध है जिससे रात के समय किसानों को शासकीय बोर के लिए उपलब्ध बिजली की उपयोग एवं संरक्षण कई वर्षों से देते आ रहे हैं जिसके चलते उनके किसानों को आगे लाकर उनके सहारे सरपंच बना रहे पंप चालक कि उन्होंने नियुक्ति की योजना
इनका कहना है
ग्राम पंचायत नांदपुर सचिव
गुलाब पंडाग्रे
न्यू कॉलोनी क्षेत्र से ग्रामीणों से एकत्र किया गया नल जलकर जमा किए जाने हेतु बोला गया है लेकिन आज दिनांक तक नाल जलकर पंप चालक द्वारा जमा नहीं किया गयाहै





