बैतूल (रिपोर्ट कौशल घोडके) । परदेसीपुरा की रहने वाली प्रियंका गुप्ता ने एसपी से शिकायत कर बताया कि राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही है। प्रियंका ने बताया कि छत्तीसगढ़ के शाहपुर से गिरफ्तारी वारंट आने के बावजूद शाहपुर थाना द्वारा तामील नहीं की जा रही है।
प्रियंका ने आरोप लगाया है कि नीतू गुप्ता, शक्ति गुप्ता, जानवी गुप्ता, और अंजय गुप्ता को न्यायालय में उपस्थित नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा, दो साल से एफआईआर तक दर्ज नहीं हो पा रही है। मैं हर रोज थाना और एसडीओ के ऑफिस के चक्कर लगा रही हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
प्रियंका ने जानकारी दी कि नीतू गुप्ता भाजपा की वार्ड 3 से पार्षद हैं, लगातार धमकी दे रही हैं कि वह उन्हें झूठे केस में फंसा देंगी। नीतू का कहना है कि उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत है। आवेदिका ने कहा, आए दिन ऐसी धमकियां मिलती हैं, और नीतू गुप्ता खुलेआम कह रही हैं कि वह मुझे फंसा देंगी, उसका विधायक के साथ उठना बैठना है। प्रियंका ने एसपी से मांग की है कि उनकी एफआईआर दर्ज की जाए और आरोपियों को छत्तीसगढ़ न्यायालय में पेश किया जाए। उन्होंने कहा कि 16 अगस्त और 25 सितंबर को गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था, लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
बीते साल हुई मारपीट, पुलिस ने नहीं की कार्रवाई
प्रियंका ने बताया कि पिछले साल, रात के समय नीतू गुप्ता और उनके परिवार ने उनके घर में घुसकर मारपीट की थी। प्रियंका के पास इस घटना का वीडियो फुटेज भी है, लेकिन शाहपुर थाने में उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। यहां तक कि उन्हें शिकायत की रिसिप्ट भी नहीं दी गई। प्रियंका ने कहा, नीतू गुप्ता और उनके परिवार ने 27 जून 2022 को सुबह 10 बजे मेरे घर आकर वोट देने के मसले पर गाली-गलौच की और जान से मारने की धमकी दी। जब मैंने उनकी बात नहीं मानी, तो शक्ति गुप्ता ने मेरे पिता अशोक गुप्ता को फोन कर धमकी दी कि अगर प्रियंका उनके पक्ष में वोट नहीं देती, तो हमें पुलिस थाने में घसीटा जाएगा। प्रियंका का आरोप है कि नीतू गुप्ता का कहना है कि उनका पुलिस में ऊंचा संपर्क है और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि 29 जून 2022 को शाहपुर थाने में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। प्रियंका और उनके परिवार ने अब पुलिस अधीक्षक से न्याय की मांग करते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि उनका परिवार अनावेदकों की धमकियों से डरा हुआ है और वे चाहते हैं कि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि उनके परिवार को इस डर से मुक्ति मिल सके।





