महिला एवं बाल विकास द्वारा बैतूल में किए कार्यों की कलेक्टर ने की समीक्षा
जिन्हें 2007 में पहली बार इस योजना का लाभ मिला था। अप्रैल 2007 में भाजपा सरकार ने बेटियों के जन्म पर सौगात स्वरूप लाड़ली लक्ष्मी योजना शुरू की थी। कलेक्टर श्री नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने बैतूल जिले में इन 17 वर्षों में बेटियों के सरंक्षण और संरक्षक के रूप में क्रियान्वित कार्यों की समीक्षा की।
महिला एवं बाल विकास विभाग के श्री गौतम अधिकारी ने योजना के क्रियान्वयन के बारे में बताया कि मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के प्रारंभ से आज दिनांक तक कुल 113792 बालिकाओं को लाभांवित किया गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में कुल 5 हजार 672 बालिका को लाभांवित किया गया है। योजना दिशा–निर्देशानुसार बालिकाओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। जिसमें बालिका के नाम से शासन की ओर से 1 लाख 43 हजार रूपए का आश्वासन प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। योजनांतर्गत पंजीकृत बालिका को कक्षा 6 वीं में प्रवेश पर 2 हजार रूपए,
कक्षा 9 वीं में प्रवेश पर 4 हजार रूपए,
कक्षा 11 वीं में प्रवेश पर 6 हजार रूपए एवं कक्षा 12वीं में प्रवेश पर 6 हजार रूपए छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। लाड़ली बालिकाओं को कक्षा 12वीं के पश्चात् स्नातक अथवा व्यवसायिक पाठ्यक्रम में (पाठ्यक्रम अवधि न्यूनतम दो वर्ष) प्रवेश लेने पर 25 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दो समान किश्तों में पाठ्यक्रम के प्रथम एवं अंतिम वर्ष में दी जाती है। बालिका की आयु 21 वर्ष पूर्ण होने पर,
कक्षा 12 वी की परीक्षा में सम्मिलित होने पर एवं बालिका का विवाह,
शासन द्वारा निर्धारित आयु पूर्ण करने के उपरांत होने पर 1 लाख की राशि का अंतिम भुगतान किये जाने का प्रावधान है। योजनांतर्गत आज दिनांक कुल 49 हजार 300 बालिकाओं को कुल 14.26 करोड़ की छात्रवृत्ति प्रदान की गई है।
कक्षा 9 वीं में प्रवेश पर 4 हजार रूपए,
कक्षा 11 वीं में प्रवेश पर 6 हजार रूपए एवं कक्षा 12वीं में प्रवेश पर 6 हजार रूपए छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। लाड़ली बालिकाओं को कक्षा 12वीं के पश्चात् स्नातक अथवा व्यवसायिक पाठ्यक्रम में (पाठ्यक्रम अवधि न्यूनतम दो वर्ष) प्रवेश लेने पर 25 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दो समान किश्तों में पाठ्यक्रम के प्रथम एवं अंतिम वर्ष में दी जाती है। बालिका की आयु 21 वर्ष पूर्ण होने पर,
कक्षा 12 वी की परीक्षा में सम्मिलित होने पर एवं बालिका का विवाह,
शासन द्वारा निर्धारित आयु पूर्ण करने के उपरांत होने पर 1 लाख की राशि का अंतिम भुगतान किये जाने का प्रावधान है। योजनांतर्गत आज दिनांक कुल 49 हजार 300 बालिकाओं को कुल 14.26 करोड़ की छात्रवृत्ति प्रदान की गई है।
लाड़ली लक्ष्मी योजना–पात्र हितग्राही
बालिका जन्म के प्रति आमजन की नकारात्मक सोच,
लिंग अनुपात में सुधार,
बालिकाओं की शैक्षणिक स्तर तथा स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार तथा उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के उद्देश्य से लाड़ली लक्ष्मी योजना लागू की गई है। जिनके माता–पिता मध्य प्रदेश के मूल निवासी हों,
आयकर दाता न हों। द्वितीय बालिका के प्रकरण में आवेदन करने से पूर्व माता या पिता ने परिवार नियोजन अपना लिया हो वे इस योजना का लाभ ले सकते है।
लिंग अनुपात में सुधार,
बालिकाओं की शैक्षणिक स्तर तथा स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार तथा उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के उद्देश्य से लाड़ली लक्ष्मी योजना लागू की गई है। जिनके माता–पिता मध्य प्रदेश के मूल निवासी हों,
आयकर दाता न हों। द्वितीय बालिका के प्रकरण में आवेदन करने से पूर्व माता या पिता ने परिवार नियोजन अपना लिया हो वे इस योजना का लाभ ले सकते है।
6-6 हजार 5 वर्ष तक हुए जमा
श्री अधिकारी ने बताया कि योजनांतर्गत बालिका के नाम से,
पंजीकरण के समय से लगातार पांच वर्षों तक रूपये 6-6 हजार मध्यप्रदेश लाड़ली लक्ष्मी योजना निधि में जमा किये जाऐंगें। अर्थात कुल राशि रुपये 30000 बालिका के नाम से जमा किये जाएंगे। बालिका के कक्षा 6 में प्रवेश लेने पर 2 हजार रूपए,
कक्षा 9 वीं में प्रवेश लेने पर 4 हजार,
कक्षा 11 वीं में प्रवेश लेने पर 6 हजार रूपए तथा 12वीं कक्षा में प्रवेश लेने पर 6 हजार रूपए ई–पेमेंट के माध्यम से किया जाएगा। लाड़ली बालिकाओं को कक्षा 12वीं के पश्चात् स्नातक अथवा व्यवसायिक पाठ्यक्रम में (पाठ्यक्रम अवधि न्यूनतम दो वर्ष) प्रवेश लेने पर रूपये 25 हजार की प्रोत्साहन राशि दो समान किश्तों में पाठ्यक्रम के प्रथम एवं अंतिम वर्ष में दी जाएगी। बालिका की आयु 21 वर्ष पूर्ण होने पर,
कक्षा 12वी की परीक्षा में सम्मिलित होने पर एवं बालिका का विवाह,
शासन द्वारा निर्धारित आयु पूर्ण करने के उपरांत होने पर 1 लाख की राशि का अंतिम भुगतान किये जाने का प्रावधान है।
पंजीकरण के समय से लगातार पांच वर्षों तक रूपये 6-6 हजार मध्यप्रदेश लाड़ली लक्ष्मी योजना निधि में जमा किये जाऐंगें। अर्थात कुल राशि रुपये 30000 बालिका के नाम से जमा किये जाएंगे। बालिका के कक्षा 6 में प्रवेश लेने पर 2 हजार रूपए,
कक्षा 9 वीं में प्रवेश लेने पर 4 हजार,
कक्षा 11 वीं में प्रवेश लेने पर 6 हजार रूपए तथा 12वीं कक्षा में प्रवेश लेने पर 6 हजार रूपए ई–पेमेंट के माध्यम से किया जाएगा। लाड़ली बालिकाओं को कक्षा 12वीं के पश्चात् स्नातक अथवा व्यवसायिक पाठ्यक्रम में (पाठ्यक्रम अवधि न्यूनतम दो वर्ष) प्रवेश लेने पर रूपये 25 हजार की प्रोत्साहन राशि दो समान किश्तों में पाठ्यक्रम के प्रथम एवं अंतिम वर्ष में दी जाएगी। बालिका की आयु 21 वर्ष पूर्ण होने पर,
कक्षा 12वी की परीक्षा में सम्मिलित होने पर एवं बालिका का विवाह,
शासन द्वारा निर्धारित आयु पूर्ण करने के उपरांत होने पर 1 लाख की राशि का अंतिम भुगतान किये जाने का प्रावधान है।
लाडो अभियान
श्री अधिकारी ने बताया कि मध्यप्रदेश देश में प्रथम राज्य है,
जिसने बाल विवाह के रोकथाम हेतु 2013 में लाडो अभियान प्रारंभ किया गया। लाडो अभियान का मुख्य उद्देश्य–जनसमुदाय की मानसिकता में सकारात्मक बदलाव के साथ बाल विवाह जैसी कुरीति को सामुदायिक सहभागिता से समाप्त करना है। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला,
खण्ड, स्कूल, ग्राम स्तरीय एंव सेवा प्रदाताओं की कार्यशाला का आयोजन कर उपस्थित प्रतिभागियों को अभियान के प्रति संवेदनशील बनाना है। साथ ही विभिन्न माध्यमों जैसे–सेवा प्रदाताओं के दुकानों एवं प्रमुख स्थानों पर दीवार लेखन,
जागरुकता रेली रथ यात्रा,
शासकीय धार्मिक कार्यक्रमों में बाल विवाह न करने की शपथ,
जिंगल, डाक्यूमेन्ट्री नुक्कड़ नाटक, होर्डिंग एवं दैनिक समाचार पत्रों में विज्ञापन के द्वारा प्रचार–प्रसार कर आमजन तक लाडो अभियान के संदेश को पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। यह अभियान बाल विवाह प्रतिशेध अधिनियम 2006 के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं एवं 21 वर्ष से कम आयु के बालकों के बाल विवाह कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में महती भूमिका निभाता है ।
जिसने बाल विवाह के रोकथाम हेतु 2013 में लाडो अभियान प्रारंभ किया गया। लाडो अभियान का मुख्य उद्देश्य–जनसमुदाय की मानसिकता में सकारात्मक बदलाव के साथ बाल विवाह जैसी कुरीति को सामुदायिक सहभागिता से समाप्त करना है। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला,
खण्ड, स्कूल, ग्राम स्तरीय एंव सेवा प्रदाताओं की कार्यशाला का आयोजन कर उपस्थित प्रतिभागियों को अभियान के प्रति संवेदनशील बनाना है। साथ ही विभिन्न माध्यमों जैसे–सेवा प्रदाताओं के दुकानों एवं प्रमुख स्थानों पर दीवार लेखन,
जागरुकता रेली रथ यात्रा,
शासकीय धार्मिक कार्यक्रमों में बाल विवाह न करने की शपथ,
जिंगल, डाक्यूमेन्ट्री नुक्कड़ नाटक, होर्डिंग एवं दैनिक समाचार पत्रों में विज्ञापन के द्वारा प्रचार–प्रसार कर आमजन तक लाडो अभियान के संदेश को पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। यह अभियान बाल विवाह प्रतिशेध अधिनियम 2006 के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं एवं 21 वर्ष से कम आयु के बालकों के बाल विवाह कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में महती भूमिका निभाता है ।
लाडो अभियान अन्तर्गत बाल विवाह को रोकने हेतु प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2014 में लोक प्रशासन के उत्कृष्ठ कार्य हेतु प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मनित किया गया। भारत सरकार द्वारा लाडो अभियान के क्रियान्वयन के अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए लाडो अभियान को अन्तराष्ट्रीय कामनवेल्थ एसोसिएशन फॉर एडमिनिस्ट्रेशन एण्ड मैनेजमेन्ट सीएपीएएमबी के अंन्तर्गत सिटिजन फोकस इनोवेशन में सीएमपीएएमबी पुरस्कार से वर्ष 2016 में सम्मानित किया गया। म.प्र. के लाडो अभियान अंतर्गत बाल विवाह रोकथाम के क्रियान्वयन को हरियाणा,
त्रिपुरा व असम के राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के द्वारा फील्ड विजिट कर सराहा गया। एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया हैदराबाद के द्वारा भारत सरकार के निर्देशानुसारे लाडो अभियान को अन्य राज्यों में क्रियान्वित करने के संबंध में स्टडी करायी गयी थी। एएससीआई हैदराबाद द्वारा की गई स्टडी में लाडो अभियान की प्रशंसा की एवं राष्ट्रीय स्तर की बैठक में सराहना करते हुए अपने अनुभवों को साझा किया।
त्रिपुरा व असम के राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के द्वारा फील्ड विजिट कर सराहा गया। एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया हैदराबाद के द्वारा भारत सरकार के निर्देशानुसारे लाडो अभियान को अन्य राज्यों में क्रियान्वित करने के संबंध में स्टडी करायी गयी थी। एएससीआई हैदराबाद द्वारा की गई स्टडी में लाडो अभियान की प्रशंसा की एवं राष्ट्रीय स्तर की बैठक में सराहना करते हुए अपने अनुभवों को साझा किया।
बाल विवाह रोकथाम के लिए बच्चों को बनाया ब्रान्ड एम्बेसडर
बाल विवाह रोकथाम में बच्चों को ब्रान्ड एम्बेसडर बनाकर उनका सहयोग लिया जा रहा है। ब्रान्ड एम्बेसडर के प्रयासों से बच्चों के द्वारा स्वयं का एंव क्षेत्र के अन्य बच्चों के बाल विवाह रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी जा रही है। इसके अलावा लाडो अभियान अंन्तर्गत विवाह में सेवा देने वाले सेवा प्रदाताओं धर्मगुरु,
मैरिज गार्डन/धर्मशाला,
बैण्ड वाले, केटरिंग, ब्यूटी पार्लर, सैलून, प्रिन्टिग प्रेस,
समाज के मुखिया आदि के बाल विवाह में सेवायें न देने के लिए सहयोग लिया जा रहा है एवं उनकी दुकानों/स्थलों में बाल विवाह कानून अपराध है,
हम सेवाप्रदाता बाल विवाह का विरोध करते है,
संबंधी दीवार लेखन करवाया गया है। लाडो अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन से जहां एएचएस 2012-13 में बाल विवाह 42 प्रतिशत होते थे,
वहीं एनएफएचएस 4 के अनुसार 2015-2016 में बाल विवाह की दर 12 प्रतिशत कम होकर 30 प्रतिशत हो गयी है।
मैरिज गार्डन/धर्मशाला,
बैण्ड वाले, केटरिंग, ब्यूटी पार्लर, सैलून, प्रिन्टिग प्रेस,
समाज के मुखिया आदि के बाल विवाह में सेवायें न देने के लिए सहयोग लिया जा रहा है एवं उनकी दुकानों/स्थलों में बाल विवाह कानून अपराध है,
हम सेवाप्रदाता बाल विवाह का विरोध करते है,
संबंधी दीवार लेखन करवाया गया है। लाडो अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन से जहां एएचएस 2012-13 में बाल विवाह 42 प्रतिशत होते थे,
वहीं एनएफएचएस 4 के अनुसार 2015-2016 में बाल विवाह की दर 12 प्रतिशत कम होकर 30 प्रतिशत हो गयी है।






