Tuesday, October 13, 2026
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लेख : प्राथमिक शिक्षक एक दायित्व

लेख : प्राथमिक शिक्षक : एक दायित्व

इंदौर(Indore) । हमारे देश और समाज में आज बदलाव का दौर है और इसमें कोई दौरह
नहीं है कि  बदलाव में सर्वाधिक योगदान
शिक्षा जगत का है
, एक शिक्षक की भूमिका हर कदम पर महत्वपूर्ण नजर आती है; एक
मार्गदर्शक के रूप में
, एक सलाहकार के तौर पर…

हम देखते हैं, की कोई इंसान शिशु अवस्था से लेकर हर एक अवस्था
में यहां तक की वृद्धावस्था में भी शिक्षकों/ गुरुओं के मार्गदर्शन में रहते हैं ।

आश्चर्य तो तब होता है जब एक नन्हा बच्चा मां की गोद से निकलकर स्कूल
में शिक्षा का अर्जन करने के उद्देश्य कदम रखता है। उस समय सबसे ज्यादा दायित्व एक
प्राथमिक शिक्षक का होता है
, बच्चों को एक जिम्मेदार और नैतिक नागरिक बनाने
में अपनी भूमिका का पूर्ण निर्वहन करते हैं। एक प्राथमिक शिक्षक का उद्देश्य
बच्चों को न केवल पाठ्यक्रम के ज्ञान से अभिभूत कराना है बल्कि सर्वांगीण विकास पर
ध्यान देना है
; वह नैतिक आदर्श, करुणा, उदारता, ईमानदारी, निष्पक्षता
तथा तटस्थता जैसे मूल्यों के आवरण से परिपूर्ण कराना है
; साथ
ही पहचानना कि बच्चों की अभिरुचि किस क्षेत्र में है। (जैसे खेलकूद में
, शिक्षा
जगत में
, राजनीति के क्षेत्र में… इत्यादि ) और
उसी दिशा में उनका मार्गदर्शन करना प्राथमिक शिक्षकों का महत्वपूर्ण दायित्व होता
है।

इसके लिए जरूरी है शिक्षक का संवेदनशील होना, समझदार
होना साथ ही बहुआयाम तरीको से प्रशिक्षित होना
…।  इन प्रावधानों में कोई कंप्रोमाइज नहीं क्योंकि
मुद्दा साफ है कि उनके हाथों में भविष्य की बागडोर हैं
, मगर
ये विचारणीय बिंदु है कि आज शिक्षा का क्षेत्र रोजगार का साधन बन गया
, राजनीतिक
दलों का बेपरवाही का मुद्दा और पद पर सेवा देना महज एक औपचारिकता बन गया है।

हमें बेहतर शिक्षक तभी मिल सकते हैं जब हमारे समाज में शिक्षक बनना
रोजगार का साधन नहीं बल्कि ख्वाब या पहली पसंद होना चाहिए।

हमारे समाज  एवं सरकार की भी
शिक्षक के प्रति जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें काम की पर्याप्त परिस्थितियों के
साथ सामाजिक- आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए उन्हें प्रोत्साहित किया जाए उन्हें
सम्मानित किया जाए
…।।

     

               जब सब ने
तिरस्कार किया
,

             तुमने शिक्षा का
उदगार किया
…

        समाज में व्याप्त
सारे भेदभाव को नष्ट किया
,

मैं सदैव ऋणी तुम्हारा जो तुमने हमसब पर उपकार किया।। 

– सहदीप महाराज

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