Saturday, August 15, 2026
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समाज और शासन के बीच सेतु का काम कर रही नवांकुर संस्थाएं: मोहन नागर

नवांकुर संस्थाओं के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू पंचायती राज से लेकर जैविक कृषि तक, विशेषज्ञों ने दी गहन जानकारी जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर ने आदर्श ग्राम की अवधारणा पर प्रकाश डाला

बैतूल।( कौशल घोडके ) मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के तत्वावधान में चयनित नवांकुर संस्थाओं के लिए दो दिवसीय जिला स्तरीय क्षमता वृद्धि प्रशिक्षण का शुभारंभ भारत भारती आवासीय विद्यालय में हुआ। पहले दिन मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर, वरिष्ठ समाजसेवी शिर्डी संस्था से डॉ. उपमा दीवान और कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. मेघा दुबे ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में जिला समन्वयक प्रिया चौधरी ने जन अभियान परिषद की भूमिका और प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण नवांकुर संस्थाओं को अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने और समाज सेवा में अधिक कुशलता लाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर ने आदर्श ग्राम की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से संस्थाएं अपने कार्यों में पारंगत हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह मंच ज्ञान और अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान करता है। संस्थाओं को हमेशा अपने कार्य के प्रति प्रशिक्षित होते रहना चाहिए प्रशिक्षण में कुछ बातें ज्ञान की प्राप्त होती हैं हमें विभिन्न लोगों के अनुभव से सीखने को मिलती है। हमारा यह प्रशिक्षण इसी को ध्यान में रखकर बनाया गया है कि हम अपने विषय में पारंगत हो सके। उन्होंने कहा कि नवांकुर संस्थाएं शासन एवं समाज के बीच में एक सेतु का कार्य कर रही हैं।
वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. उपमा दीवान ने संस्थाओं को विभिन्न प्रोजेक्ट्स और पंचायती राज अधिनियम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पंचायती राज की धाराओं को समझकर संस्थाएं महिलाओं और आजीविका मिशन समूहों के साथ जुड़कर काम कर सकती हैं। इसके लिए हमें शिक्षित व कुशल होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा विभिन्न प्रकार के सेक्टर आज सरकार के साथ काम कर रहे हैं। महिलाओं आजीविका मिशन के समूह कार्य कर रहे हैं हम उनके साथ काम कर सकते हैं।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. मेघा दुबे ने जैविक कृषि पर जोर देते हुए वर्मी कंपोस्ट, फसल चक्र और बायोफर्टिलाइजर के उपयोग के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि एक गाय से 30 एकड़ में जैविक खेती की जा सकती है। प्राकृतिक खेती अपनाने से मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ती है और पर्यावरण को नुकसान नहीं होता।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने भारत भारती की गोशाला, जैविक कृषि प्रकल्प और गोबर गैस संयंत्र का भ्रमण किया। उन्होंने व्यावहारिक रूप से सीखा कि जैविक कृषि और स्वावलंबन कैसे संभव है।
इस कार्यक्रम में जन अभियान परिषद के सभी ब्लॉक समन्वयकों की उपस्थिति रही। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के अनुभव और विचारों से प्रेरणा लेते हुए प्रशिक्षण को सफल बनाने की सराहना की। प्रशिक्षण का समापन अगले दिन विभिन्न गतिविधियों और मूल्यांकन के साथ होगा।
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