आमला । शिक्षा अनेक गुरुओं से प्राप्त हो सकती है, लेकिन दीक्षा केवल एक ही गुरु से संभव है। यही दिव्य संदेश आज परम पूज्य मुनिश्री 108 विनत सागर जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में व्यक्त किया। अवसर था वर्षायोग 2025 के अंतर्गत चातुर्मास के शुभारंभ का, जो इस वर्ष आमला नगरी में संपन्न हो रहा है।
आमला की पावन धरा आज सकल दिगंबर जैन समाज की आध्यात्मिक ऊर्जा से भावविभोर रही। मुनिश्री विनत सागर जी के साथ श्रमण श्री 108 विश्ववद्सागर जी मुनिराज की गरिमामयी उपस्थिति में संत निवास पर भव्य आयोजन किया गया।

पर्व और त्योहार: आत्म साधना और उल्लास का संगम
अपने प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि पर्व और त्योहार दोनों के अलग-अलग स्वरूप होते हैं। पर्व आत्मशुद्धि, तपस्या, त्याग और उपासना का प्रतीक है, जबकि त्योहार उल्लास, आनंद और उत्सव का भाव जगाता है।
मुनिश्री विनत सागर जी का चौथा स्वतंत्र चातुर्मास
यह मुनिश्री का चौथा स्वतंत्र चातुर्मास है। इससे पूर्व:
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पहला चातुर्मास — मथुरा
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दूसरा चातुर्मास — ललितपुर
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तीसरा चातुर्मास — खंडवा
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और अब चौथा — आमला में संपन्न हो रहा है।
साथ ही दो चातुर्मास उन्होंने आचार्य श्री के सान्निध्य में भी पूर्ण किए हैं।
आयोजन की भव्यता और आध्यात्मिक रंग
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और चित्र अनावरण से हुई। इसके बाद समाज के बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी को भावविभोर कर दिया। पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट के साथ मुनिश्री का पूजन संपन्न हुआ।
आचार्य परंपरा का अर्घ्य अर्पण करते हुए आचार्य विराटसागर जी एवं आचार्य विशुद्ध सागर जी का पुण्य पूजन भी किया गया।
समाज के सभी वर्गों — वरिष्ठजन, महिलाएं, युवा और बच्चे — ने मिलकर गुरु वंदना कर अपनी श्रद्धा प्रकट की।
गुरु पूर्णिमा और अवतरण दिवस का दुर्लभ संयोग
इस अवसर को और भी पावन बना दिया गुरु पूर्णिमा एवं मुनिश्री 108 विनत सागर जी के अवतरण दिवस के सुंदर संयोग ने। इस दोहरे उत्सव में श्रद्धालुओं ने भक्ति गीत गाकर और मुनिश्री के आशीर्वचन सुनकर आत्मिक आनंद की अनुभूति की।
समाज का सामूहिक आभार
कार्यक्रम के अंत में सकल जैन समाज आमला के अध्यक्ष ने समाजजनों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आगामी चार मास तक आमला नगरी को मुनिश्री जी के सान्निध्य और आशीर्वाद का लाभ मिलता रहेगा।





